प्रदेश के 12 जिलाें में टिड्डी दल ने कहर बरपा रखा है। पिछले 9 माह में ये करीब 7 लाख हैक्टेयर से अधिक भू-भाग पर फसलें ही क्या, पेड़ाें तक काे चट कर चुके हैं। कई इंसानों काे भी जख्मी कर चुके। लेकिन जिम्मेदार मैदान से गायब हैं और ज्यादातर जगह ग्रामीण और किसान धुआं कर, थाली व डीजे बजाकर तथा अन्य देशी तरीकाें से इनकाे उड़ाने में जुटे हुए हैं।
प्रदेश में सौ साल में टिड्डियों का यह सबसे बड़ा हमला है। पिछले साल के 21 मई से लेकर अब तक किसानाें की बर्बादी का सिलसिला जारी है। हैरान करने वाली यह स्थिति तब है, जबकि प्रदेश में केंद्र ने टिड्डी नियंत्रण के लिए एक विभाग भी बना रखा है। विभाग के कर्मचारी केवल खाली पड़त जमीन पर दवा का छिड़काव कर मौन हैं। जब उनसे पूछा गया कि टिड्डियाें ने इतना विकराल रूप कैसे धारण कर लिया ताे जवाब मिला कि पाकिस्तान बताता ही नहीं तो हम पहले कैसे पता चले कि टिड्डियां आ रही हैं। किसान सूचना देते हैं तो कृषि विभाग से वेरिफाई करने के बाद इन्हें मारने के कीटनाशक का छिड़काव शुरू होता है।
न फसलें छाेड़ी, न पेड़-पाैधे
बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, जालौर, सिरोही, पाली, नागौर, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, डूंगरपुर तक टिड्डी दल फैल चुका है। छह जिलों में तो फसलाें के अलावा पेड़-पाैधाें तक काे चट कर दिया। पहली बार 12 जिले तक इनका फैलाव हुआ है, जबकि इससे पहले ये तीन से चार जिलाें तक फैलने के बाद ही काबू में कर लिए जाते थे।
56 साल में 19 बार कंट्रोल किया, इस बार 9 माह में भी नहीं हो रहा
प्रदेश में 1964 से 2019 तक टिड्डी दल ने 19 बार हमले किए। हर बार अक्टूबर तक कंट्रोल कर फसलों को बचाया गया। इस बार जनवरी मध्य तक भी टिड्डियां कंट्रोल नहीं हो रही। इस बार पहले पीले परिपक्व टिड्डी दल ने हमला बोला। अब पिंक कलर के अल्प वयस्कों के रह रह कर हमले हो रहे हैं। वर्ष 1863, 1964, 1968, 1970, 1973 से 1976, 1978, 1983, 1986, 1988, 1989, 1990, 1993, 1997, 2005, 2007, 2010, 2019 में टिड्डी दल का हमला हो चुका है। नवंबर के बाद भी बड़ा टिड्डी हमला पचास साल में पहली बार हुआ। अब तक ज्यादातर टिड्डी दल अक्टूबर-नवंबर तक कंट्रोल कर लिए जाते थे। 1978 और 1993 में पिछली सदी का सबसे बड़ा हमला हुआ था। उस साल भी जुलाई से अक्टूबर तक टिड्डी दल ने 2 लाख हैक्टेयर से अधिक भूभाग पर हमला बोला था। इस बार कृषि विभाग के अनुसार ही करीब पौने 4 लाख हैक्टेयर में टिड्डियां मारने के लिए दवा का छिड़काव किया जा चुका है।
हम करीब पौने चार लाख हैक्टेयर में छिड़काव करवा चुके। मंत्री हरीश चौधरी व सुखराम विश्नोई लगातार क्षेत्र में हैं। मेरे सहित सीएम और कई मंत्री, केंद्रीय दल कंट्रोल के प्रयास में लगे हैं।-नरेशपाल गंगवार, सचिव, कृषि
हम कंट्रोल तभी करते हैं, जब किसान सूचना देते हैं। हमें बाॅर्डर पार से समय रहते सूचना नहीं मिलने के कारण हम कोई पूर्व तैयारी भी नहीं कर पाते। -मोहनलाल टैलर, जैसलमेर लोकस्ट वार्निंग कंट्रोल रूम